प्रतिज्ञा - Pratigya

पर दोनों सजल आँखें कृतज्ञता और विनय से भरी हुई भूमि की ओर ताक रही थीं। कमलाप्रसाद उसे देख कर अवाक-सा रह गया। वह इस इरादे से आया था कि इसे किसी भाँति यहाँ से टाल दूँ। मैके चले जाने की प्रेरणा करूँ। उसे इसकी जरा भी चिंता न थी कि इस अबला का भविष्य क्या होगा। उसका निर्वाह कैसे होगा, उसकी रक्षा कौन करेगा, इसका उसे लेश-मात्र भी ध्यान न था। वह केवल इस समय उसे यहाँ से टाल कर अपने रुपए बचा लेना चाहता था, पर विधवा की सरल, निष्कलंक,


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पर दोनों सजल आँखें कृतज्ञता और विनय से भरी हुई भूमि की ओर ताक रही थीं। कमलाप्रसाद उसे देख कर अवाक-सा रह गया। वह इस इरादे से आया था कि इसे किसी भाँति यहाँ से टाल दूँ। मैके चले जाने की प्रेरणा करूँ। उसे इसकी जरा भी चिंता न थी कि इस अबला का भविष्य क्या होगा। उसका निर्वाह कैसे होगा, उसकी रक्षा कौन करेगा, इसका उसे लेश-मात्र भी ध्यान न था। वह केवल इस समय उसे यहाँ से टाल कर अपने रुपए बचा लेना चाहता था, पर विधवा की सरल, निष्कलंक,


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