प्रतिज्ञा - Pratigya



पूर्णा - 'कुछ नहीं, असमंजस क्या है?'

कमलाप्रसाद - 'तो आदमियों को जा कर भेज दूँ।'

पूर्णा - 'भेज दीजिएगा, अभी जल्दी क्या है?'

कमलाप्रसाद - 'तुम व्यर्थ ही इतना संकोच कर रही हो पूर्णा, क्या तुम समझती हो तुम्हारा जाना मेरे घर के प्राणियों को बुरा लगेगा?'

कमलाप्रसाद का अनुमान ठीक था। पूर्णा को वास्तव में यही आपत्ति थी, पर वह संकोच-वश इसे प्रकट न कर सकती थी। उसने समझा, बाबू जी ने मेरे मन की बात ताड़ ली। इससे वह लज्जित


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पूर्णा - 'कुछ नहीं, असमंजस क्या है?'

कमलाप्रसाद - 'तो आदमियों को जा कर भेज दूँ।'

पूर्णा - 'भेज दीजिएगा, अभी जल्दी क्या है?'

कमलाप्रसाद - 'तुम व्यर्थ ही इतना संकोच कर रही हो पूर्णा, क्या तुम समझती हो तुम्हारा जाना मेरे घर के प्राणियों को बुरा लगेगा?'

कमलाप्रसाद का अनुमान ठीक था। पूर्णा को वास्तव में यही आपत्ति थी, पर वह संकोच-वश इसे प्रकट न कर सकती थी। उसने समझा, बाबू जी ने मेरे मन की बात ताड़ ली। इससे वह लज्जित


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