एक दिन यह महल ढह जाएगा। यही अभिशाप मेरे मुँह से बार-बार निकलता है।' पूर्णा ने विस्मित हो कर कहा - 'ऐसा क्यों कहती हो बहन? फिर उसे एक बात याद हो गई। पूछा - 'क्या अभी भैयाजी नहीं आए?'
पूर्णा ने एक लंबी साँस खींच कर कहा - 'मेरे भाग्य से अपने भाग्य की तुलना न करो, बहन पराश्रय से बड़ी विपत्ति दुर्भाग्य के कोश में नहीं है।'
सुमित्रा चली गई। पूर्णा ने बत्ती बुझा दी और लेटी, पर नींद कहाँ? आज ही उसने इस घर में कदम रखा था और
एक दिन यह महल ढह जाएगा। यही अभिशाप मेरे मुँह से बार-बार निकलता है।' पूर्णा ने विस्मित हो कर कहा - 'ऐसा क्यों कहती हो बहन? फिर उसे एक बात याद हो गई। पूछा - 'क्या अभी भैयाजी नहीं आए?'
पूर्णा ने एक लंबी साँस खींच कर कहा - 'मेरे भाग्य से अपने भाग्य की तुलना न करो, बहन पराश्रय से बड़ी विपत्ति दुर्भाग्य के कोश में नहीं है।'
सुमित्रा चली गई। पूर्णा ने बत्ती बुझा दी और लेटी, पर नींद कहाँ? आज ही उसने इस घर में कदम रखा था और