के सामने खड़े सिगरेट पी रहे थे। पूछा - 'कैसा खत है?'
'तुम मेरी गरदन पर छुरी चला रहे हो।'
'तो गोली ही क्यों न मार दो कि हमेशा का झंझट मिट जाए।'
यह धमकी अपना काम कर गई। दाननाथ ने पत्र पर हस्ताक्षर कर दिया और तब बिगड़ कर बोले - 'देख लेना मैं आज संखिया खा लेता हूँ कि नहीं। यह पत्र रखा ही रह जाएगा। 'सबेरे राम नाम सत्त होगी।'
तब अमृतराय ने हँस कर कहा- 'संखिया न हो, तो मैं दे दूँगा। एक बार किसी दवा में डालने के लिए मँगवाई थी।'
के सामने खड़े सिगरेट पी रहे थे। पूछा - 'कैसा खत है?'
'तुम मेरी गरदन पर छुरी चला रहे हो।'
'तो गोली ही क्यों न मार दो कि हमेशा का झंझट मिट जाए।'
यह धमकी अपना काम कर गई। दाननाथ ने पत्र पर हस्ताक्षर कर दिया और तब बिगड़ कर बोले - 'देख लेना मैं आज संखिया खा लेता हूँ कि नहीं। यह पत्र रखा ही रह जाएगा। 'सबेरे राम नाम सत्त होगी।'
तब अमृतराय ने हँस कर कहा- 'संखिया न हो, तो मैं दे दूँगा। एक बार किसी दवा में डालने के लिए मँगवाई थी।'