प्रतिज्ञा - Pratigya



लाला दाननाथ जी, आपने अमृतराय से यह पत्र लिखा कर मेरा और प्रेमा का जितना आदर किया है, उसका आप अनुमान नहीं कर सकते। उचित तो यही था कि मैं उसे फाड़ कर फेंक देता और आपको कोई जवाब न देता, लेकिन...

बदरीप्रसाद ने कागज की ओर सिर झुकाए हुए कहा - 'अमृतराय का कोई खत नहीं आया।'

बदरीप्रसाद - 'हाँ, आदमी तो उन्हीं का था, पर खत दाननाथ का था। उसी का जवाब लिख रहा हूँ। महाशय ने अमृतराय से खत लिखाया है और नीचे अपने दस्तखत कर दिए हैं। अपने हाथ से लिखते शर्म आती थी,


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लाला दाननाथ जी, आपने अमृतराय से यह पत्र लिखा कर मेरा और प्रेमा का जितना आदर किया है, उसका आप अनुमान नहीं कर सकते। उचित तो यही था कि मैं उसे फाड़ कर फेंक देता और आपको कोई जवाब न देता, लेकिन...

बदरीप्रसाद ने कागज की ओर सिर झुकाए हुए कहा - 'अमृतराय का कोई खत नहीं आया।'

बदरीप्रसाद - 'हाँ, आदमी तो उन्हीं का था, पर खत दाननाथ का था। उसी का जवाब लिख रहा हूँ। महाशय ने अमृतराय से खत लिखाया है और नीचे अपने दस्तखत कर दिए हैं। अपने हाथ से लिखते शर्म आती थी,


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