1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

के मुंह पर ही उन्होंने ये पैगंबरी शब्द बोले थे-

‘‘आज आप मुझे फांसी पर लटका सकते हैं-आप हर दिन मेरे जैसे अन्य लोगों को भी फांसी पर लटका सकते हैं; परंतु मेरे जैसे अन्य लोगों को भी फांसी पर लटका सकते हैं; परंतु मेरे स्थान पर हजारों क्रांतिकारी उत्पन्न होंगे और आपका उद्देश्य कभी भी पूरा नहीं होगा।’’

हे भारतीय जन! इन शब्दों को पूरा किया जाना चाहिए। ओ हुतात्माओ! हमारे रक्त का प्रतिशोेध अवश्य लिया जाएगा।


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के मुंह पर ही उन्होंने ये पैगंबरी शब्द बोले थे-

‘‘आज आप मुझे फांसी पर लटका सकते हैं-आप हर दिन मेरे जैसे अन्य लोगों को भी फांसी पर लटका सकते हैं; परंतु मेरे जैसे अन्य लोगों को भी फांसी पर लटका सकते हैं; परंतु मेरे स्थान पर हजारों क्रांतिकारी उत्पन्न होंगे और आपका उद्देश्य कभी भी पूरा नहीं होगा।’’

हे भारतीय जन! इन शब्दों को पूरा किया जाना चाहिए। ओ हुतात्माओ! हमारे रक्त का प्रतिशोेध अवश्य लिया जाएगा।


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