1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

लक्ष्मीबाई का रक्त क्रोध से उबल रह है। कुंवर सिंह की ब्रिटिश शासन को छिन्न-भिन्न करने की एकमात्र प्रतिज्ञा आज भी हिंदुस्तान की हवा में गूंज रही है। अजीमुल्ला खान और वीर अली शाह के तन से निकली रक्त-धाराओं ने इतिहास के पृष्ठों पर अमिट छाप छोड़ी है। क्योंकि जब अपना अपराध स्वीकार करने और युद्धनीति के रहस्यों को प्रकट करने से इंकार करने पर वीर तात्या टोपे को फांसी के फंदे पर ले जाया जा रहा था तो फिरंगियों


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लक्ष्मीबाई का रक्त क्रोध से उबल रह है। कुंवर सिंह की ब्रिटिश शासन को छिन्न-भिन्न करने की एकमात्र प्रतिज्ञा आज भी हिंदुस्तान की हवा में गूंज रही है। अजीमुल्ला खान और वीर अली शाह के तन से निकली रक्त-धाराओं ने इतिहास के पृष्ठों पर अमिट छाप छोड़ी है। क्योंकि जब अपना अपराध स्वीकार करने और युद्धनीति के रहस्यों को प्रकट करने से इंकार करने पर वीर तात्या टोपे को फांसी के फंदे पर ले जाया जा रहा था तो फिरंगियों


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