12 जून तक विद्रोह कर निकल गए। इस विद्रोह से सर हेनरी को एक तरह का संतोष ही हुआ। क्योंकि इससे उसके शिविर में यूरोपियन सेना की रेजिमंेट, यूरोपियन तोपखाना और मंजे हुए राजनिष्ठ सिख और हिंदुस्थानी रेजिमेंट-ऐसा चुना हुआ और विश्वासपात्र लश्कर शेष रह गया था। सर हेनरी अब लड़ाई के लिए हर तरह से तैयार हो गया था।
लखनऊ के आसपास अवध प्रांत के विद्रोही सिपाही और लड़ाकू लोग इकट्ठा होते जा रहे थे। उनकी और अंगे्रजों
12 जून तक विद्रोह कर निकल गए। इस विद्रोह से सर हेनरी को एक तरह का संतोष ही हुआ। क्योंकि इससे उसके शिविर में यूरोपियन सेना की रेजिमंेट, यूरोपियन तोपखाना और मंजे हुए राजनिष्ठ सिख और हिंदुस्थानी रेजिमेंट-ऐसा चुना हुआ और विश्वासपात्र लश्कर शेष रह गया था। सर हेनरी अब लड़ाई के लिए हर तरह से तैयार हो गया था।
लखनऊ के आसपास अवध प्रांत के विद्रोही सिपाही और लड़ाकू लोग इकट्ठा होते जा रहे थे। उनकी और अंगे्रजों