1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

की गंध बहुत दूर से बहुत पहले ही आ जाने के कारण उसने राजधानी के मच्छी भवन और रेजिडेंसी-ये दो स्थान हर तरह से मजबूत कर लश्करी शक्ति से पूर्ण कर लिये थे, यह पहले ही कहा है। लखनऊ की नेटिव सेना 31 मई को विद्रोह कर निकल जाने के बाद उसने सिख लोगों की एक उŸाम रेजिमेंट तैयार की और पक्के राजनिष्ठ नेटिव लोगों को लेकर एक और रेजिमेंट बनाई। इसके अतिरिक्त नेटिव लश्कर के जो-जो भाग अभी तक राजनिष्ठ बचे हुए थे वे सारे


1019 of 2102

की गंध बहुत दूर से बहुत पहले ही आ जाने के कारण उसने राजधानी के मच्छी भवन और रेजिडेंसी-ये दो स्थान हर तरह से मजबूत कर लश्करी शक्ति से पूर्ण कर लिये थे, यह पहले ही कहा है। लखनऊ की नेटिव सेना 31 मई को विद्रोह कर निकल जाने के बाद उसने सिख लोगों की एक उŸाम रेजिमेंट तैयार की और पक्के राजनिष्ठ नेटिव लोगों को लेकर एक और रेजिमेंट बनाई। इसके अतिरिक्त नेटिव लश्कर के जो-जो भाग अभी तक राजनिष्ठ बचे हुए थे वे सारे


1019 of 2102