1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

देने लगे कि अब हिंदुस्थान देश स्वतंत्र करने के लिए, कानपुर और दिल्ली की ओर सेना सहित तू हमरा सेनापति बनकर निकले।’’ सिंधिया ने उन्हें आज निकलता हूं, कल निकूंलगा-ऐसी गपों में उलझाकर और कुछ दिन चुप रखा। तात्या टोपे गुप्त रूप से ग्वालियर आया और उसके द्वारा इस भुलावे से सिंधिया की फौज को निकालने तक सिंधिया की सेना ऐसी ही निश्चय रही, इसीलिए अभी आगरा के अंग्रजों की जान में जान है। क्योंकि आगरा के वायव्य प्रदेश


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देने लगे कि अब हिंदुस्थान देश स्वतंत्र करने के लिए, कानपुर और दिल्ली की ओर सेना सहित तू हमरा सेनापति बनकर निकले।’’ सिंधिया ने उन्हें आज निकलता हूं, कल निकूंलगा-ऐसी गपों में उलझाकर और कुछ दिन चुप रखा। तात्या टोपे गुप्त रूप से ग्वालियर आया और उसके द्वारा इस भुलावे से सिंधिया की फौज को निकालने तक सिंधिया की सेना ऐसी ही निश्चय रही, इसीलिए अभी आगरा के अंग्रजों की जान में जान है। क्योंकि आगरा के वायव्य प्रदेश


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