सेना के साथ ब्रिगेडियर पाॅलवल आगरे पर चढ़े आ रहे विद्रोहियों से लड़ने चल पड़ा। सिसीआ में दोनों पक्ष दिन भर एक-दूसरे से भिड़े रहे। अंत में विद्रोहियों की मार के आगे टिके रहना अंगे्रजों को कठिन हो गया और अंगे्रजी सेना पीछे लौट पड़ी। यह देखते ही विजयानंद से उत्साहित विद्रोही उन्हें पीठ पर मारते-कूदते आगे बढ़े। आगरा में वह
1857 का स्वातंत्र्य समर - 220
पराभूत अंगे्रजी सेना घुसते ही और उनके पीछे विद्रोहियों की विजय ध्वनि सुनकर आगरा को,
सेना के साथ ब्रिगेडियर पाॅलवल आगरे पर चढ़े आ रहे विद्रोहियों से लड़ने चल पड़ा। सिसीआ में दोनों पक्ष दिन भर एक-दूसरे से भिड़े रहे। अंत में विद्रोहियों की मार के आगे टिके रहना अंगे्रजों को कठिन हो गया और अंगे्रजी सेना पीछे लौट पड़ी। यह देखते ही विजयानंद से उत्साहित विद्रोही उन्हें पीठ पर मारते-कूदते आगे बढ़े। आगरा में वह
1857 का स्वातंत्र्य समर - 220
पराभूत अंगे्रजी सेना घुसते ही और उनके पीछे विद्रोहियों की विजय ध्वनि सुनकर आगरा को,