1857 को मार गया और अंग्रेजी राज्यसŸाा को दुःखी छोड़ गया।
ग्वालियर से हुई लोकपद की इस क्रांति-चेतना का इंछौर में भी ऐसा ही भयानक विस्फोट हुआ। इंदौर के पास स्थित महू छावनी की सारी सेना और इंदौर की राज्यसŸाा का गुप्त व्यवहार निरंतर चालू था और विद्रोह का विचार भी इसी से बना। 1 जुलाई को इंदौर दरबार के एक मुसलमान सरदार सादत खान ने रेजिडेंसी के फिरंगियों पर टूट पड़ने का सेना को आदेश दिया। महाराज की मुझे यही आज्ञा है,
1857 को मार गया और अंग्रेजी राज्यसŸाा को दुःखी छोड़ गया।
ग्वालियर से हुई लोकपद की इस क्रांति-चेतना का इंछौर में भी ऐसा ही भयानक विस्फोट हुआ। इंदौर के पास स्थित महू छावनी की सारी सेना और इंदौर की राज्यसŸाा का गुप्त व्यवहार निरंतर चालू था और विद्रोह का विचार भी इसी से बना। 1 जुलाई को इंदौर दरबार के एक मुसलमान सरदार सादत खान ने रेजिडेंसी के फिरंगियों पर टूट पड़ने का सेना को आदेश दिया। महाराज की मुझे यही आज्ञा है,