इस तरह आगरा स्वतंत्र होते ही अंगे्रजों के साथ पराजय और अपमान के क्षुब्ध, चिंताग्रस्त सर कोलविन किले में जाकर बैठ गया। उसे अब एक ही डर था कि शिंदे क्या करता है? शिंदे विद्रोहियों से मिल गया, केवल इतने समाचार भर से वह प्रचंड किला व्रिदोहियों के हाथ लग जाता। परंतु सिंधिया विरूद्ध नहीं है-यह उसके द्वारा भेजे जानेवाले पत्रों और रसद से स्पष्ट होते ही आगरे के अंगे्रजी झंडे में जान आ गई। परंतु उस झंडे के भार से कोलविन 9 सितंबर,
इस तरह आगरा स्वतंत्र होते ही अंगे्रजों के साथ पराजय और अपमान के क्षुब्ध, चिंताग्रस्त सर कोलविन किले में जाकर बैठ गया। उसे अब एक ही डर था कि शिंदे क्या करता है? शिंदे विद्रोहियों से मिल गया, केवल इतने समाचार भर से वह प्रचंड किला व्रिदोहियों के हाथ लग जाता। परंतु सिंधिया विरूद्ध नहीं है-यह उसके द्वारा भेजे जानेवाले पत्रों और रसद से स्पष्ट होते ही आगरे के अंगे्रजी झंडे में जान आ गई। परंतु उस झंडे के भार से कोलविन 9 सितंबर,