अतः उन्होंने क्रांति की विजय हाने पर भी अपना हित सुरक्षित रहे, इसलिए पूरी तरह अंगे्रजों का साथ नहीं दिया और परिणाम उलटा हो जाए तो भी हित बना रहे, इसलिए पूरी तरह क्रांति का भी साथ न देने का दांव चलाया था। लोग और सेना अपनी
1857 का स्वातंत्र्य समर - 221
रेजिडेंसी से अंगे्रजों को भगा देना चाहते हैं तो उन्हें वैसा करने दिया जाए, जिससे राज्य स्वतंत्र हो जाए; परंतु इधर अंगे्रजों से मित्रता की बातचीत चालू रहे,
अतः उन्होंने क्रांति की विजय हाने पर भी अपना हित सुरक्षित रहे, इसलिए पूरी तरह अंगे्रजों का साथ नहीं दिया और परिणाम उलटा हो जाए तो भी हित बना रहे, इसलिए पूरी तरह क्रांति का भी साथ न देने का दांव चलाया था। लोग और सेना अपनी
1857 का स्वातंत्र्य समर - 221
रेजिडेंसी से अंगे्रजों को भगा देना चाहते हैं तो उन्हें वैसा करने दिया जाए, जिससे राज्य स्वतंत्र हो जाए; परंतु इधर अंगे्रजों से मित्रता की बातचीत चालू रहे,