आदि रियासतों जैसा द्रोह नहीं किया-परंतु यह अप्रत्यक्ष द्रोह किया कि केवल स्वतंत्रता के शुभ अस्तित्व की आशा में स्वार्थ का अशुभ भाव मन में रखा। इसीलिए वह सिपाहियों का विद्रोह विफल और देश पराजित हुआ।
राज आचरण की इस शुभ-अशुभता ने या अशुभ-शुभता ने लोक आचरण को स्पर्श नहीं किया और इस लोकवर्तन के तेजस्वी आघात से ही पेशावर से कलकŸाा तक रक्त की बरसात हुई। प्रचंड आग जली, ज्वालामुखी की भयंकर ध्वति के कारण अंगे्रजी सŸाा-मंदिर गिरकर ध्वसत हो गया।
आदि रियासतों जैसा द्रोह नहीं किया-परंतु यह अप्रत्यक्ष द्रोह किया कि केवल स्वतंत्रता के शुभ अस्तित्व की आशा में स्वार्थ का अशुभ भाव मन में रखा। इसीलिए वह सिपाहियों का विद्रोह विफल और देश पराजित हुआ।
राज आचरण की इस शुभ-अशुभता ने या अशुभ-शुभता ने लोक आचरण को स्पर्श नहीं किया और इस लोकवर्तन के तेजस्वी आघात से ही पेशावर से कलकŸाा तक रक्त की बरसात हुई। प्रचंड आग जली, ज्वालामुखी की भयंकर ध्वति के कारण अंगे्रजी सŸाा-मंदिर गिरकर ध्वसत हो गया।