परंतु यह ऐसा प्रलयी धक्का होगा, इसकी कलकŸाा और इंग्लैंड को कैसी अपूर्ण कल्पना थी। मेरठ के समाचार से पहले सरकार के विचार से हिंदुस्थान में पूर्ण शांति का राज था। यह छोड़ें, मेरठ में विस्फोट के बाद दिल्ली में नए साम्राज्य की घोषणा हुई, इस विस्फोट का अर्थ कलकŸाा की समझ में नहीं आया था। मेरठ के 10 मई के विस्फोट से 31 मई के सार्वजनिक विस्फोट तक विद्रोह की जलहर कहीं चली ही नहीं, यह देखकर हिंदुस्थान में कहीं भी गड़बड़ी नहीं है,
परंतु यह ऐसा प्रलयी धक्का होगा, इसकी कलकŸाा और इंग्लैंड को कैसी अपूर्ण कल्पना थी। मेरठ के समाचार से पहले सरकार के विचार से हिंदुस्थान में पूर्ण शांति का राज था। यह छोड़ें, मेरठ में विस्फोट के बाद दिल्ली में नए साम्राज्य की घोषणा हुई, इस विस्फोट का अर्थ कलकŸाा की समझ में नहीं आया था। मेरठ के 10 मई के विस्फोट से 31 मई के सार्वजनिक विस्फोट तक विद्रोह की जलहर कहीं चली ही नहीं, यह देखकर हिंदुस्थान में कहीं भी गड़बड़ी नहीं है,