झांसी के झोकन बाग में, इलाहाबाद के बाजार में, बनारस के घाट पर, सब ओर शांति और निर्भयता। तारयंत्र के राई-राई से टुकड़े, रेलगाड़ियां, लोहे की पटरियां और रेल के पुल टूटे-फूटे धूल में मिले हुए, हर नदी में यूरोपियनों के शव बहते हुए, रास्ते-रास्ते में रक्त के ताल तलैया-सब ओर शांति और निर्भयता।
तब कलकŸाा का मोहभंग हुआ। 12 जून, को सारे यूरोपियना नागरिकों ने स्वंयसेवकों की टोलियां बनाना चालू किया। यूरोपियन दुकानदार,
झांसी के झोकन बाग में, इलाहाबाद के बाजार में, बनारस के घाट पर, सब ओर शांति और निर्भयता। तारयंत्र के राई-राई से टुकड़े, रेलगाड़ियां, लोहे की पटरियां और रेल के पुल टूटे-फूटे धूल में मिले हुए, हर नदी में यूरोपियनों के शव बहते हुए, रास्ते-रास्ते में रक्त के ताल तलैया-सब ओर शांति और निर्भयता।
तब कलकŸाा का मोहभंग हुआ। 12 जून, को सारे यूरोपियना नागरिकों ने स्वंयसेवकों की टोलियां बनाना चालू किया। यूरोपियन दुकानदार,