1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

झांसी के झोकन बाग में, इलाहाबाद के बाजार में, बनारस के घाट पर, सब ओर शांति और निर्भयता। तारयंत्र के राई-राई से टुकड़े, रेलगाड़ियां, लोहे की पटरियां और रेल के पुल टूटे-फूटे धूल में मिले हुए, हर नदी में यूरोपियनों के शव बहते हुए, रास्ते-रास्ते में रक्त के ताल तलैया-सब ओर शांति और निर्भयता।

तब कलकŸाा का मोहभंग हुआ। 12 जून, को सारे यूरोपियना नागरिकों ने स्वंयसेवकों की टोलियां बनाना चालू किया। यूरोपियन दुकानदार,


1056 of 2102

झांसी के झोकन बाग में, इलाहाबाद के बाजार में, बनारस के घाट पर, सब ओर शांति और निर्भयता। तारयंत्र के राई-राई से टुकड़े, रेलगाड़ियां, लोहे की पटरियां और रेल के पुल टूटे-फूटे धूल में मिले हुए, हर नदी में यूरोपियनों के शव बहते हुए, रास्ते-रास्ते में रक्त के ताल तलैया-सब ओर शांति और निर्भयता।

तब कलकŸाा का मोहभंग हुआ। 12 जून, को सारे यूरोपियना नागरिकों ने स्वंयसेवकों की टोलियां बनाना चालू किया। यूरोपियन दुकानदार,


1056 of 2102