पिस्तौल भर रहे हैं, हर दरवाजे के पीछे कबाड़ खड़ा कर रहे हैं। कौंसिल के सदस्य परिवार के साथ घरबार छोड़कर भाग रहे हैं। जहाजों पर चढ़कर जान बचा रहे हैं। उनसे निचले दर्जें के अधिकारी भी वरिष्ठ जनों की राह पकड़कर अपनी-अपनी मूल्यवान चीजें इकट्ठा कर किले में घुसकर तोपों के आश्रय में शरण पाने की भिक्षा मांगने लगे। गोरे लोग घोड़ों, गाड़ियों, पालकियों, हर तरह और प्रकार के वाहनों मंे भर-भरकर जान बचाने के लिए इधर-उधर
पिस्तौल भर रहे हैं, हर दरवाजे के पीछे कबाड़ खड़ा कर रहे हैं। कौंसिल के सदस्य परिवार के साथ घरबार छोड़कर भाग रहे हैं। जहाजों पर चढ़कर जान बचा रहे हैं। उनसे निचले दर्जें के अधिकारी भी वरिष्ठ जनों की राह पकड़कर अपनी-अपनी मूल्यवान चीजें इकट्ठा कर किले में घुसकर तोपों के आश्रय में शरण पाने की भिक्षा मांगने लगे। गोरे लोग घोड़ों, गाड़ियों, पालकियों, हर तरह और प्रकार के वाहनों मंे भर-भरकर जान बचाने के लिए इधर-उधर