भाग रहे थे। शहर के बाहर का हर ईसाई घर खुला पड़ा था। आध दर्जन निश्चयी धर्मांध रहे होते तो शहर का तीन-चैथाई भाग जलाकर रख कर देते।’’
अंगे्रज सरकार की राजधानी में केवल एक बाजारू गप से इतनी ‘शांति और
1857 का स्वातंत्र्य समर - 223
निर्भरता’ व्याप्त हो गई। उस शांति-निर्भयता के उत्पादक बैरकपुर के सिपाहियों और कलकŸाा में रह रहे अवध के नवाब के वजीर अली नक्की खान का उच्चाटन करने के लिए सरकार ने कमर कसी।
भाग रहे थे। शहर के बाहर का हर ईसाई घर खुला पड़ा था। आध दर्जन निश्चयी धर्मांध रहे होते तो शहर का तीन-चैथाई भाग जलाकर रख कर देते।’’
अंगे्रज सरकार की राजधानी में केवल एक बाजारू गप से इतनी ‘शांति और
1857 का स्वातंत्र्य समर - 223
निर्भरता’ व्याप्त हो गई। उस शांति-निर्भयता के उत्पादक बैरकपुर के सिपाहियों और कलकŸाा में रह रहे अवध के नवाब के वजीर अली नक्की खान का उच्चाटन करने के लिए सरकार ने कमर कसी।