पागल होकर पैर पटक-पटककर नाचने लगा। उसका वह पैर पटकना अभी तक चालू है। विद्रोह में विद्रोहियों के लिए कत्लेआम ने मनुष्य जाति के निर्मल यथ पर पक्की आसुरी कालिमा चढ़ा दी, यह उनका गुस्सें में कहना-उनके लिखे इतिहास की पंक्ति-पंक्ति से वे चीखें आज तक जोर-जोर से सुनाई दे रही हैं। और उन चीखों के अखंड हल्ले-गुल्ले से विश्व के कान के परदे हमेशा के लिए फट गए। सन् 1857 का नाम लेते ही उनके शरीर पर भय से कांटे और
पागल होकर पैर पटक-पटककर नाचने लगा। उसका वह पैर पटकना अभी तक चालू है। विद्रोह में विद्रोहियों के लिए कत्लेआम ने मनुष्य जाति के निर्मल यथ पर पक्की आसुरी कालिमा चढ़ा दी, यह उनका गुस्सें में कहना-उनके लिखे इतिहास की पंक्ति-पंक्ति से वे चीखें आज तक जोर-जोर से सुनाई दे रही हैं। और उन चीखों के अखंड हल्ले-गुल्ले से विश्व के कान के परदे हमेशा के लिए फट गए। सन् 1857 का नाम लेते ही उनके शरीर पर भय से कांटे और