के-दंड के पूर्व तत्काल विवरणात्मक जांच होनी ही चाहिए। विप्लव, रक्तपात और प्रतिशोध के कृत्य जैसे स्वयमेव अन्याय स्वरूप हैं वेसे ही वह कभी-कभी न्याय के संवर्धन के लिए प्रकृति द्वारा उत्पन्न् न्यायिक शस्त्र भी हैं। और जब इन भयंकर साधनों से न्यायमूर्ति-‘शत्रुरूधिरदग्धपाणिमुख
1857 का स्वातंत्र्य समर - 226
विकट प्रकट भैरवी’-ऐसी हो जाती है तब-तब उस भयंकरता का दोष उस न्यायमूर्ति का न होकर जिस मदमत्त के
के-दंड के पूर्व तत्काल विवरणात्मक जांच होनी ही चाहिए। विप्लव, रक्तपात और प्रतिशोध के कृत्य जैसे स्वयमेव अन्याय स्वरूप हैं वेसे ही वह कभी-कभी न्याय के संवर्धन के लिए प्रकृति द्वारा उत्पन्न् न्यायिक शस्त्र भी हैं। और जब इन भयंकर साधनों से न्यायमूर्ति-‘शत्रुरूधिरदग्धपाणिमुख
1857 का स्वातंत्र्य समर - 226
विकट प्रकट भैरवी’-ऐसी हो जाती है तब-तब उस भयंकरता का दोष उस न्यायमूर्ति का न होकर जिस मदमत्त के