1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

भाजन की अवस्था प्राप्ति संभव करने के लिए उसकी विरोधी अन्यायमूलक प्रवत्ति का निर्मलन करने मंे मानवी मन लगा हुआ है तब तक विप्लव, विद्रोह, रक्तपात और प्रतिशोध आदि शब्द कवेल अधमता के अधिकारी नहीं होंगे। ‘राज्य’ शब्द जब तक न्यायमूलक दोनों सत्ताओं के लिए मान्य है तब तक तद्विरोधक विप्लव, विद्रोह शब्द भी जैसे अन्यायमूल वैसे ही न्यायमूलक भी हो सकेगा और तब तक विप्लव, रक्तपात और प्रतिशोध आदि के कथानकों और कथानायकों


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भाजन की अवस्था प्राप्ति संभव करने के लिए उसकी विरोधी अन्यायमूलक प्रवत्ति का निर्मलन करने मंे मानवी मन लगा हुआ है तब तक विप्लव, विद्रोह, रक्तपात और प्रतिशोध आदि शब्द कवेल अधमता के अधिकारी नहीं होंगे। ‘राज्य’ शब्द जब तक न्यायमूलक दोनों सत्ताओं के लिए मान्य है तब तक तद्विरोधक विप्लव, विद्रोह शब्द भी जैसे अन्यायमूल वैसे ही न्यायमूलक भी हो सकेगा और तब तक विप्लव, रक्तपात और प्रतिशोध आदि के कथानकों और कथानायकों


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