1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

होगा। उसे ज्ञान से प्राप्त समझ या बूझ कभी नहीं कहा जा सकता। फ्रांस की राज्य क्रांति या हाॅलैंड की धर्म क्रांति जैसी अद्भुत घटनाएं जब पाठकों एवं लेखकों को अपनी भव्यता से चकित करती हैं तब उनकी उस भव्यता में हक्का-बक्का होकर पाठक की दृष्टि और लेखक की लेखनी भी उसके मूल शक्ति-स्त्रोत को देखने-दर्शाने की हिम्मत नहीं कर पाती। परंतु उस मूल शक्ति को जाने बिना उस क्रांति का वास्तविक रहस्य कभी भी समझ में नहीं आता,


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होगा। उसे ज्ञान से प्राप्त समझ या बूझ कभी नहीं कहा जा सकता। फ्रांस की राज्य क्रांति या हाॅलैंड की धर्म क्रांति जैसी अद्भुत घटनाएं जब पाठकों एवं लेखकों को अपनी भव्यता से चकित करती हैं तब उनकी उस भव्यता में हक्का-बक्का होकर पाठक की दृष्टि और लेखक की लेखनी भी उसके मूल शक्ति-स्त्रोत को देखने-दर्शाने की हिम्मत नहीं कर पाती। परंतु उस मूल शक्ति को जाने बिना उस क्रांति का वास्तविक रहस्य कभी भी समझ में नहीं आता,


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