अतः इतिहास शास्त्र में वर्णन से अधि कमूल स्त्रोत को दर्शाने ही अधिक महत्त्वपूर्ण माना गया है।
यह मूल स्त्रोत दर्शाने हुए बहुत बार इतिहास-लेखक और एक चूक करते हैं। प्रत्येक कार्य में कुछ प्रत्यक्ष, कुछ अप्रत्यक्ष, कुछ विशिष्ट और कुछ सामान्य, कुछ आकस्मिक और कुछ प्रधान कारण निहित होते हैं और उनका वर्गीकरण करने में ही इतिहास-लेखक का वास्तविक कौशल होता है। परंतु कुछ इतिहासकार यहां भ्रमित होकर इस वर्गीकरण
अतः इतिहास शास्त्र में वर्णन से अधि कमूल स्त्रोत को दर्शाने ही अधिक महत्त्वपूर्ण माना गया है।
यह मूल स्त्रोत दर्शाने हुए बहुत बार इतिहास-लेखक और एक चूक करते हैं। प्रत्येक कार्य में कुछ प्रत्यक्ष, कुछ अप्रत्यक्ष, कुछ विशिष्ट और कुछ सामान्य, कुछ आकस्मिक और कुछ प्रधान कारण निहित होते हैं और उनका वर्गीकरण करने में ही इतिहास-लेखक का वास्तविक कौशल होता है। परंतु कुछ इतिहासकार यहां भ्रमित होकर इस वर्गीकरण