ऐसा की कहा जाता। इसलिए यह प्रतिशोध अन्याय की अपरिहार्य प्रतिक्रिया है तो फिर एक बार सारा देश उबल उठे और किसी एक स्थान पर जनसमूह कत्लेआम कर दें-यह आश्चर्य नहीं। आश्चर्य तो यह है कि हर स्थान पर ऐसा कत्लेआम क्यों नहीं हुआ? क्योंकि जहां कत्लेआम हुआ और जिन्होंने वह किया उनका संतप्त तर्कशास्त्र सहज ही उद्घोष कर उठा-शठे शाठ्यं समाचरेत्! काली नदी की लड़ाई में पकड़े गए सिपाहियों को फांसी पर चढ़ाने के पहले अंगे्रजों ने पूछा,
ऐसा की कहा जाता। इसलिए यह प्रतिशोध अन्याय की अपरिहार्य प्रतिक्रिया है तो फिर एक बार सारा देश उबल उठे और किसी एक स्थान पर जनसमूह कत्लेआम कर दें-यह आश्चर्य नहीं। आश्चर्य तो यह है कि हर स्थान पर ऐसा कत्लेआम क्यों नहीं हुआ? क्योंकि जहां कत्लेआम हुआ और जिन्होंने वह किया उनका संतप्त तर्कशास्त्र सहज ही उद्घोष कर उठा-शठे शाठ्यं समाचरेत्! काली नदी की लड़ाई में पकड़े गए सिपाहियों को फांसी पर चढ़ाने के पहले अंगे्रजों ने पूछा,