जब उस अभागे देश में रक्त की नदी तेजी से बहने लगी और जब उस रक्त में क्राॅमवेल की तलवार से कटी अनेक निरीह महिलाएं अपने गोद के बच्चों सहित तैरने लगीं, तब आयरलैंड जीतने का मूल हेतु पापकारी होते हुए भी उस क्राॅमवेल ने, अपने स्वधर्मियों का जितना क्रूरतम प्रतिशोध लिया और क्रूरतम रक्तपात किया उतना भी हिंदुस्थान ने सन् 1857 मंे उन परधर्मी, परवर्णीयों का रक्तपात नहीं किया। अंगे्रज महिलाओं को बचाने के लिए नाना साहब,
जब उस अभागे देश में रक्त की नदी तेजी से बहने लगी और जब उस रक्त में क्राॅमवेल की तलवार से कटी अनेक निरीह महिलाएं अपने गोद के बच्चों सहित तैरने लगीं, तब आयरलैंड जीतने का मूल हेतु पापकारी होते हुए भी उस क्राॅमवेल ने, अपने स्वधर्मियों का जितना क्रूरतम प्रतिशोध लिया और क्रूरतम रक्तपात किया उतना भी हिंदुस्थान ने सन् 1857 मंे उन परधर्मी, परवर्णीयों का रक्तपात नहीं किया। अंगे्रज महिलाओं को बचाने के लिए नाना साहब,