1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

उससे उसकी धवल नीति को तिल मात्र भी लघुता नहीं आती, उलटे कत्ल हुए अन्याय के दुष्ट अत्याचारों के घिनौनेपन में पर्वत तुल्य वृद्धि हो जाती है तथा ऐसे ही अवसरों पर मैकाले का वह प्रसिद्ध वाक्य यथार्थ हो जाता है-‘‘ज्ीम उवतम अपवसमदज जीम वनजतंहमए जीम ंेेनतमक ूम मिमस जींज ं तमअवसनजपवद ूंे दमबमेेंतल’’ण् (अत्याचार जितना भयानक उतनी ही उसकी प्रतिक्रिया भी अटल)

और सत्य का यह यथार्थ स्वर सुनने की क्षमता विश्व के कानों में न बचे,


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उससे उसकी धवल नीति को तिल मात्र भी लघुता नहीं आती, उलटे कत्ल हुए अन्याय के दुष्ट अत्याचारों के घिनौनेपन में पर्वत तुल्य वृद्धि हो जाती है तथा ऐसे ही अवसरों पर मैकाले का वह प्रसिद्ध वाक्य यथार्थ हो जाता है-‘‘ज्ीम उवतम अपवसमदज जीम वनजतंहमए जीम ंेेनतमक ूम मिमस जींज ं तमअवसनजपवद ूंे दमबमेेंतल’’ण् (अत्याचार जितना भयानक उतनी ही उसकी प्रतिक्रिया भी अटल)

और सत्य का यह यथार्थ स्वर सुनने की क्षमता विश्व के कानों में न बचे,


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