1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

नसीराबाद के विद्रोहियों के द्वारा प्राणदान दिए जाने के बाद भाग रहे गोरों को देखकर रासते के ग्रामीण जब चिल्लाने लगे-मारो फिरंगी को-तब वहां के एक परिवार ने आगे बढ़कर कहा कि उन्होंने अभी-अभी हमारे साथ भोजन किया है, यद्यपि वे कट्टर शत्रु हैं, तब भी उनको कैसे मारा जा सकता है।

जिसके सामान्य ग्रामीणों में भी ऐसी उदात्त वीरता व्याप्त है वह शांत हिंदुस्थान सन्


1857 का स्वातंत्र्य समर - 229

1857 जैसी कितनी ही क्रूर मार-काट करे,


1095 of 2102

नसीराबाद के विद्रोहियों के द्वारा प्राणदान दिए जाने के बाद भाग रहे गोरों को देखकर रासते के ग्रामीण जब चिल्लाने लगे-मारो फिरंगी को-तब वहां के एक परिवार ने आगे बढ़कर कहा कि उन्होंने अभी-अभी हमारे साथ भोजन किया है, यद्यपि वे कट्टर शत्रु हैं, तब भी उनको कैसे मारा जा सकता है।

जिसके सामान्य ग्रामीणों में भी ऐसी उदात्त वीरता व्याप्त है वह शांत हिंदुस्थान सन्


1857 का स्वातंत्र्य समर - 229

1857 जैसी कितनी ही क्रूर मार-काट करे,


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