1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

लगती है। इसलिए ऐतिहासिक घटनाओं का--और विशेषकर क्रांतिकारी घटनाओं का-इतिहास लिखते समय उसका केवल वर्णन लिखने से उकसी समुचित कल्पना प्रस्तुत करना संभव नहीं होता या उसका उद्गम उसके निमित्त कारण तक ही खोजकर लौट आने से भी उसका यथार्थ स्वरूप ज्ञात नहीं होता। अतः जिसे सत्य, पक्षपात-रहित और मर्मस्पर्शी इतिहास लिखना हो, उसे उस घटना और उस क्रांति की ज्वाला की नींव के कारणों का, उसके मूल में क्या तत्त्व थे, उसके


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लगती है। इसलिए ऐतिहासिक घटनाओं का--और विशेषकर क्रांतिकारी घटनाओं का-इतिहास लिखते समय उसका केवल वर्णन लिखने से उकसी समुचित कल्पना प्रस्तुत करना संभव नहीं होता या उसका उद्गम उसके निमित्त कारण तक ही खोजकर लौट आने से भी उसका यथार्थ स्वरूप ज्ञात नहीं होता। अतः जिसे सत्य, पक्षपात-रहित और मर्मस्पर्शी इतिहास लिखना हो, उसे उस घटना और उस क्रांति की ज्वाला की नींव के कारणों का, उसके मूल में क्या तत्त्व थे, उसके


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