1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

प्रधान कारण क्या थे-इन सबका पर्यालोचन अवश्य करना चाहिए।

‘हर क्रांति की नींच में कोई-न-कोई तत्त्व होना ही चाहिए’ -इटली के प्रख्यात दार्शनिक और देशभक्त मैजिनी ने कार्लाइल लिखित फ्रांसिसी राज्य क्रांति की एक पुस्तक पर टीकात्मक लेख में ऐसा कहा है। क्रांति अथवा इतिहास में मनुष्य जाति के जीवन की उठा-पटक होती है। जिसके लिए लाखों जूझते हैं, राजसिंहासन जिस कारण डगमगाते हैं,


1857 का स्वातंत्र्य समर - 34


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प्रधान कारण क्या थे-इन सबका पर्यालोचन अवश्य करना चाहिए।

‘हर क्रांति की नींच में कोई-न-कोई तत्त्व होना ही चाहिए’ -इटली के प्रख्यात दार्शनिक और देशभक्त मैजिनी ने कार्लाइल लिखित फ्रांसिसी राज्य क्रांति की एक पुस्तक पर टीकात्मक लेख में ऐसा कहा है। क्रांति अथवा इतिहास में मनुष्य जाति के जीवन की उठा-पटक होती है। जिसके लिए लाखों जूझते हैं, राजसिंहासन जिस कारण डगमगाते हैं,


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