1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

सागर उछलकर ऊपर आने लगा। अत्याचारी अन्याय उसमें डूब गया। अत्याचारी अन्याय, तू कहीं भी पैर रख, कड़ा पृष्ठ भाग तुझे मिलेगा ही नहीं। अब अंतकाल में तुम्हें समझ में आएगा कि ऊपर से काले दिखते भू-पृष्ठ के नीचे रक्त के-लाल-लाल रक्त के-प्रवाह होते हैं और उस कान के परदे फाड़नेवाले ज्वालामुखी के प्रस्फोट की वह प्रचंड ध्वनि अब तो सुन।


1857 का स्वातंत्र्य समर - 232


भाग-3

अग्नि-कल्लोल


प्रकरण-9

दिल्ली लड़ती है


1111 of 2102

सागर उछलकर ऊपर आने लगा। अत्याचारी अन्याय उसमें डूब गया। अत्याचारी अन्याय, तू कहीं भी पैर रख, कड़ा पृष्ठ भाग तुझे मिलेगा ही नहीं। अब अंतकाल में तुम्हें समझ में आएगा कि ऊपर से काले दिखते भू-पृष्ठ के नीचे रक्त के-लाल-लाल रक्त के-प्रवाह होते हैं और उस कान के परदे फाड़नेवाले ज्वालामुखी के प्रस्फोट की वह प्रचंड ध्वनि अब तो सुन।


1857 का स्वातंत्र्य समर - 232


भाग-3

अग्नि-कल्लोल


प्रकरण-9

दिल्ली लड़ती है


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