1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

तब उस बूढ़े बादशाह ने अपने लवाजमे के साथ हाथी पर बैठकर सारे शहर से एक विशाल जुलूस निकालकर यह घोषित कर प्रकट किया कि अपना यह जेहाद केवल विदेशी फिरंगियों के लिए है, हिंदुओं के विरूद्ध नहीं है। जो कोई भी गाय की हत्या करता पाया जाएगा उसे तोप से उड़ा दिया जाएगा या उसके हाथ काट दिए जाएंगे। अलग-अलग रेजिमेंटों व टोलियांे को भिन्न-भिन्न राजपुत्रों के नाम दिए गए। अंगे्रजों के विरूद्ध क्रांतिकारियों की इस लड़ाई में कुछ यूरोपियनों ने भी सहयोग दिया।


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तब उस बूढ़े बादशाह ने अपने लवाजमे के साथ हाथी पर बैठकर सारे शहर से एक विशाल जुलूस निकालकर यह घोषित कर प्रकट किया कि अपना यह जेहाद केवल विदेशी फिरंगियों के लिए है, हिंदुओं के विरूद्ध नहीं है। जो कोई भी गाय की हत्या करता पाया जाएगा उसे तोप से उड़ा दिया जाएगा या उसके हाथ काट दिए जाएंगे। अलग-अलग रेजिमेंटों व टोलियांे को भिन्न-भिन्न राजपुत्रों के नाम दिए गए। अंगे्रजों के विरूद्ध क्रांतिकारियों की इस लड़ाई में कुछ यूरोपियनों ने भी सहयोग दिया।


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