के रूप में थी। पर इस अवसर पर वह बहुत धीमा और दब्बू-सा लग रहा था। 14 जून को उसने युद्ध परिषद् (वार काउंसिल) की बैठक बुलाकर अपने अधिकारियांे से आक्रमण के विषय पर चर्चा की। आक्रमण की योजना का जोरदार भाषा में गे्रट हेड से समर्थन किया, तब भी अन्य अधिकारियों को विजय का विश्वास नहीं होता था, इसलिए उन्होंने यह प्रतिपादन किया कि इसमें प्रत्यक्ष पराभव जितनी ही शक्ति की और प्रतिष्ठा की हानि होने वाली है। दूसरा
के रूप में थी। पर इस अवसर पर वह बहुत धीमा और दब्बू-सा लग रहा था। 14 जून को उसने युद्ध परिषद् (वार काउंसिल) की बैठक बुलाकर अपने अधिकारियांे से आक्रमण के विषय पर चर्चा की। आक्रमण की योजना का जोरदार भाषा में गे्रट हेड से समर्थन किया, तब भी अन्य अधिकारियों को विजय का विश्वास नहीं होता था, इसलिए उन्होंने यह प्रतिपादन किया कि इसमें प्रत्यक्ष पराभव जितनी ही शक्ति की और प्रतिष्ठा की हानि होने वाली है। दूसरा