पकड़कर उसके विदास्पप्न भी वहा हो गए। 16 जून को युद्ध परिषद् की बैठक हुई। मर मत-भिन्नता और मन का धीरज कम होने में ही उसका अंत हुआ।
अंग्रेज अधिकारी जिस समय एक ओर जोरदार और सीधे हमले की योजना बना रहे थे उसी समय दूसरी ओर दिल्ली में नए तरूण रक्त, नए खजाने, सपंŸिा और नए उत्साह की बाढ़ आ रही थी और क्रांतिकारियों ने आज तक की बचाव की रणनीति छोड़कर अवसर के अनुरूप आक्रमण की नीति स्वीकार कर बीच-बीच में अंगे्रजी
पकड़कर उसके विदास्पप्न भी वहा हो गए। 16 जून को युद्ध परिषद् की बैठक हुई। मर मत-भिन्नता और मन का धीरज कम होने में ही उसका अंत हुआ।
अंग्रेज अधिकारी जिस समय एक ओर जोरदार और सीधे हमले की योजना बना रहे थे उसी समय दूसरी ओर दिल्ली में नए तरूण रक्त, नए खजाने, सपंŸिा और नए उत्साह की बाढ़ आ रही थी और क्रांतिकारियों ने आज तक की बचाव की रणनीति छोड़कर अवसर के अनुरूप आक्रमण की नीति स्वीकार कर बीच-बीच में अंगे्रजी