शत्रु पर हमला करने के लिए शहर के बाहर जा रहे हैं, ऐसा हर दिन दीखने लगा और हमला निपटाकर वे शहर में लौट रहे हैं, यह हर शाम दिखता था।
सिपाहियों का जो-जो दल विद्रोहियों से मिलने दिल्ली में प्रवेश करता वह दल तुरंत दूसरे दिन शत्रु पर हमला करने बाहर जाता। 13 जून को बाड़ा हिंदूराव पर फिर से हमला किया गया। 12 जून को व्रिदोहियों से जो सेना आकर मिली थी उसी ने यह हमला किया था। मेजर रीड लिखता है-‘‘गैंड टंªक मार्ग
शत्रु पर हमला करने के लिए शहर के बाहर जा रहे हैं, ऐसा हर दिन दीखने लगा और हमला निपटाकर वे शहर में लौट रहे हैं, यह हर शाम दिखता था।
सिपाहियों का जो-जो दल विद्रोहियों से मिलने दिल्ली में प्रवेश करता वह दल तुरंत दूसरे दिन शत्रु पर हमला करने बाहर जाता। 13 जून को बाड़ा हिंदूराव पर फिर से हमला किया गया। 12 जून को व्रिदोहियों से जो सेना आकर मिली थी उसी ने यह हमला किया था। मेजर रीड लिखता है-‘‘गैंड टंªक मार्ग