से वे सिपाही सीधे टुकड़ियों का संचालन करते आ रहे थे। उस पलटन का नेता सरदार बहादुर था। अपनी बाईं बगल की ओर मुड़ने का उनका हेतु होने से अपने लोगों को पीछे रहने को कहकर वह स्वयं आगे हो गया। उस दिन वे सिपाही जान की परवाह न करते हुए लड़ रहे थे। परंतु सरदार बहादुर उसके अर्दली लाल सिंह के हाथों मारा गया। उसके सीने पर की हिंदुस्थानी सेना क निशानी की पट्टी निकालकर उसने मेरी पत्नी के पास भेज दी। 17 जून को भारतीय
से वे सिपाही सीधे टुकड़ियों का संचालन करते आ रहे थे। उस पलटन का नेता सरदार बहादुर था। अपनी बाईं बगल की ओर मुड़ने का उनका हेतु होने से अपने लोगों को पीछे रहने को कहकर वह स्वयं आगे हो गया। उस दिन वे सिपाही जान की परवाह न करते हुए लड़ रहे थे। परंतु सरदार बहादुर उसके अर्दली लाल सिंह के हाथों मारा गया। उसके सीने पर की हिंदुस्थानी सेना क निशानी की पट्टी निकालकर उसने मेरी पत्नी के पास भेज दी। 17 जून को भारतीय