1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

देनेवाले प्रसंगों को या उनकी अद्भुतता को देखकर विस्मित होकर वहीं बैठ नहीं जाना चाहिए, अपितु उसके उद्गम की खोज करते जाना चाहिए। इतना ही नहीं अपितु उस खोज में असंगत एवं आकस्मिक रूप से निकल आई शाखा को छोड़कर मूल के विस्तीर्ण प्रदेश का निरिक्षण करना चाहिए। इस तरह प्रांरभ किए जाने पर अनेक असंबद्व घटनाओं में पूर्ण संबद्धता दिखने लगती है, वक्र लगने लगती है। अंधकार में प्रकाश दिखने लगता है और प्रकाश में अंधेरा


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देनेवाले प्रसंगों को या उनकी अद्भुतता को देखकर विस्मित होकर वहीं बैठ नहीं जाना चाहिए, अपितु उसके उद्गम की खोज करते जाना चाहिए। इतना ही नहीं अपितु उस खोज में असंगत एवं आकस्मिक रूप से निकल आई शाखा को छोड़कर मूल के विस्तीर्ण प्रदेश का निरिक्षण करना चाहिए। इस तरह प्रांरभ किए जाने पर अनेक असंबद्व घटनाओं में पूर्ण संबद्धता दिखने लगती है, वक्र लगने लगती है। अंधकार में प्रकाश दिखने लगता है और प्रकाश में अंधेरा


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