दिखाई देता है। नीचता में उच्चता और उच्चता में नीचता दृष्टिगोचर होती है, विद्रूपता में सुरूपता और सुरूपता में विद्रूपता मिलती है और अपेक्षित या अनअपेक्षित रीति से परंतु स्पष्ट स्वरूप में वह क्रांति इतिहास के सामने आती है।
सन् 1857 जैसी प्रचंड क्रांति बिना हेतु के घटित होना संभव है क्या? पेशावर
1857 का स्वातंत्र्य समर - 35
से कलकत्ता तक जो आंधी चली उसका हेतु इसके सिवाय और क्या हो सकता है कि से
दिखाई देता है। नीचता में उच्चता और उच्चता में नीचता दृष्टिगोचर होती है, विद्रूपता में सुरूपता और सुरूपता में विद्रूपता मिलती है और अपेक्षित या अनअपेक्षित रीति से परंतु स्पष्ट स्वरूप में वह क्रांति इतिहास के सामने आती है।
सन् 1857 जैसी प्रचंड क्रांति बिना हेतु के घटित होना संभव है क्या? पेशावर
1857 का स्वातंत्र्य समर - 35
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