1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

पराक्रम से कोई लड़ नहीं सकता। राइफलधारी सिपाहियों पर, मार्गदर्शकों पर और खास मेरे पास के आदमियों पर उन्होंने बार-बार


हमले किए और एक बार तो मुझे लगा कि आज हम हार गए।’’

प्रत्यक्ष राणक्षेत्र पर लड़ते एक वीर अंगे्रज अधिकारी द्वारा ऐसे शब्दों में लिखना क्रांतिकारियों के हमले कितने प्रखर होंगे, इसका प्रमाण था। उसमें भी अग्नि जैसा प्रज्वलित और शक्तिशाली, फैले हुए घटकों को केंद्रित कर सके, ऐसा प्रबल नेता


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पराक्रम से कोई लड़ नहीं सकता। राइफलधारी सिपाहियों पर, मार्गदर्शकों पर और खास मेरे पास के आदमियों पर उन्होंने बार-बार


हमले किए और एक बार तो मुझे लगा कि आज हम हार गए।’’

प्रत्यक्ष राणक्षेत्र पर लड़ते एक वीर अंगे्रज अधिकारी द्वारा ऐसे शब्दों में लिखना क्रांतिकारियों के हमले कितने प्रखर होंगे, इसका प्रमाण था। उसमें भी अग्नि जैसा प्रज्वलित और शक्तिशाली, फैले हुए घटकों को केंद्रित कर सके, ऐसा प्रबल नेता


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