क्रांतिकारियों को मिला नहीं था। स्वदेश को फिर से स्वतंत्र कराने की दुर्दम्य इच्छा और प्लासी के अपमान का गुस्सा-इन दो समान बंधनों से वे क्रांतिकारी एकत्रित हुए थे। भारतीय सेना के हाथों अंगे्रजों का तोपखाना पड़ जाने का भ्रम निर्मित हो गया था और अंत में अपनी सेना को उत्साह देनेवाला मुख्य अधिकारी कर्नल वेल्शमन भी मारा गया। पूरे दिन अंगे्रजी छावनी का हर आदमी दृढ़ता से लड़ता रहा और थकता रहा और अ बवह खड़ा नहीं रह सकता,
क्रांतिकारियों को मिला नहीं था। स्वदेश को फिर से स्वतंत्र कराने की दुर्दम्य इच्छा और प्लासी के अपमान का गुस्सा-इन दो समान बंधनों से वे क्रांतिकारी एकत्रित हुए थे। भारतीय सेना के हाथों अंगे्रजों का तोपखाना पड़ जाने का भ्रम निर्मित हो गया था और अंत में अपनी सेना को उत्साह देनेवाला मुख्य अधिकारी कर्नल वेल्शमन भी मारा गया। पूरे दिन अंगे्रजी छावनी का हर आदमी दृढ़ता से लड़ता रहा और थकता रहा और अ बवह खड़ा नहीं रह सकता,