से और क्षोभ की आंधी के कारण एक जगह पर आए हजारों सिपाही एकत्र रह ही नहीं सकते थे। शहर की लूटमार और आपाधापी रोकने बादशाह और उसके सलाहकार मंत्रिगण यद्यपि लगातार प्रयत्न कर रहे थे और उपदेशा भी कर रहे थे तब भी हर दिन सिपाहियों की लूटमार, आपाधापी और दंगल मचाने के समाचार आ ही रहे थे। क्रांतिकारियों में ऐसा होना स्वाभाविक होता है।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 243
ऐसी परिस्थिति में इन असंख्य और भिन्न-भिन्न
से और क्षोभ की आंधी के कारण एक जगह पर आए हजारों सिपाही एकत्र रह ही नहीं सकते थे। शहर की लूटमार और आपाधापी रोकने बादशाह और उसके सलाहकार मंत्रिगण यद्यपि लगातार प्रयत्न कर रहे थे और उपदेशा भी कर रहे थे तब भी हर दिन सिपाहियों की लूटमार, आपाधापी और दंगल मचाने के समाचार आ ही रहे थे। क्रांतिकारियों में ऐसा होना स्वाभाविक होता है।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 243
ऐसी परिस्थिति में इन असंख्य और भिन्न-भिन्न