1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar




1857 का स्वातंत्र्य समर - 244

की। सारे शहर में डोंड़ी पीटी गई कि सरदार बख्त खान को सरसेनापति के पद पर नियुक्त किया गया है। तलवार, एक पदक और सेनापति का पद उन्हें अर्पण कर उनका सम्मान किया गया। राजपुत्र मिर्जामुगल को सेनापति पद दिया गया। उसने बादशाह को सूचित किया कि-‘शहर में लूटपाट या रक्तपात करते हुए प्रत्यक्ष राजपुत्र भी दिखाई दिया तो तत्काल उसके कान-नाक काटने में मैं आगे-पीछे नहीं देखूंगा। बादशाह ने उŸार दिया,


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1857 का स्वातंत्र्य समर - 244

की। सारे शहर में डोंड़ी पीटी गई कि सरदार बख्त खान को सरसेनापति के पद पर नियुक्त किया गया है। तलवार, एक पदक और सेनापति का पद उन्हें अर्पण कर उनका सम्मान किया गया। राजपुत्र मिर्जामुगल को सेनापति पद दिया गया। उसने बादशाह को सूचित किया कि-‘शहर में लूटपाट या रक्तपात करते हुए प्रत्यक्ष राजपुत्र भी दिखाई दिया तो तत्काल उसके कान-नाक काटने में मैं आगे-पीछे नहीं देखूंगा। बादशाह ने उŸार दिया,


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