1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

‘आपको सारे अधिकार दे दिए गए हैं, जरा भी ढील न देते हुए आपको जो उचित लगे वह करो।’ शहर कोतवाल को डांटा गया कि उसकी ढिलाई के कारण यदि गांव में लूटपाट या दंगा हुआ तो उसे भी फांसी दे दी जाएगी। बख्त खाने ने कहा कि वह अपने साथ चार पैदल टुकड़ियां, सात सौ घुड़सवार, घोड़ों पर चढ़ी छह तोपें, तीन जमीनी तोपें आदि लश्करी सामग्री लाया है। उसके साथ के सिपाहियों को छह माह का वेतन पहले ही दे दिया गया है और अभी उसके पास


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‘आपको सारे अधिकार दे दिए गए हैं, जरा भी ढील न देते हुए आपको जो उचित लगे वह करो।’ शहर कोतवाल को डांटा गया कि उसकी ढिलाई के कारण यदि गांव में लूटपाट या दंगा हुआ तो उसे भी फांसी दे दी जाएगी। बख्त खाने ने कहा कि वह अपने साथ चार पैदल टुकड़ियां, सात सौ घुड़सवार, घोड़ों पर चढ़ी छह तोपें, तीन जमीनी तोपें आदि लश्करी सामग्री लाया है। उसके साथ के सिपाहियों को छह माह का वेतन पहले ही दे दिया गया है और अभी उसके पास


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