उसे सहज ही जीतने का था। वह ऐसा आत्मविश्वास था कि मुंबई, कलकŸाा और मद्रास तक दिल्ली जीत लेने का समाचार फैल गयां और जब अंगे्रजों को बार-बार यह दिखाई दिया कि ये समाचार निराधार हैं तब सारे हिंदुस्थान के लोग एक-दूसरे से पूछने लगे-‘‘दिल्ली में अंगे्रजी सेना कर क्या रही है?’’ यही चिंता और शर्म बर्नार्ड के मन में बस गई थी और पहले की इस अंधकारमय परिस्थिति से कुछ भिन्ना हो सकेगा, उस समय ऐसा उसे नहीं लगता था।
उसे सहज ही जीतने का था। वह ऐसा आत्मविश्वास था कि मुंबई, कलकŸाा और मद्रास तक दिल्ली जीत लेने का समाचार फैल गयां और जब अंगे्रजों को बार-बार यह दिखाई दिया कि ये समाचार निराधार हैं तब सारे हिंदुस्थान के लोग एक-दूसरे से पूछने लगे-‘‘दिल्ली में अंगे्रजी सेना कर क्या रही है?’’ यही चिंता और शर्म बर्नार्ड के मन में बस गई थी और पहले की इस अंधकारमय परिस्थिति से कुछ भिन्ना हो सकेगा, उस समय ऐसा उसे नहीं लगता था।