उलटे भावी समय का विचार करते हुए उसे वह अधिक अंधियारा ही लगता। सिपाहियों के लगातार होनेवाले हमलों के कारण उसे रŸाी भर विश्राम नहीं मिलता था। इतना ही नहीं, क्रांतिकारियों की उस राजधानी पर सीधा और साहसी हमला करने की उसकी महŸकांक्षा उगते हर नए दिन धुलती जा रही है, उसे ऐसा दिखता था। अंत में शरीर से थका, मानसिक चिंता से ग्रस्त और निराशा में डूबा हुआ अंगे्रज सेनापति बर्नार्ड 5 जुलाई को हैजे की महामारी की
उलटे भावी समय का विचार करते हुए उसे वह अधिक अंधियारा ही लगता। सिपाहियों के लगातार होनेवाले हमलों के कारण उसे रŸाी भर विश्राम नहीं मिलता था। इतना ही नहीं, क्रांतिकारियों की उस राजधानी पर सीधा और साहसी हमला करने की उसकी महŸकांक्षा उगते हर नए दिन धुलती जा रही है, उसे ऐसा दिखता था। अंत में शरीर से थका, मानसिक चिंता से ग्रस्त और निराशा में डूबा हुआ अंगे्रज सेनापति बर्नार्ड 5 जुलाई को हैजे की महामारी की