किया गया। इंडिया आॅफिस लाइबे्ररी और ब्रिटिश म्यूजियम लाइब्रेरी में लगातार एक वर्ष तक बैठने के कारण यह तो छिपा नहीं था कि सावरकर 1857 का अध्ययन कर रहे हैं; परंतु उनका अध्ययन किस दिशा में जा रहा है, इसका कुछ आभास इस पैंफ्लेट की काव्यमयी ओजस्वी भाषा 1857 के शहीदों के माध्यम से भावी क्रांति का आह्नान थी। सावरकर ने लिखा-‘‘10 मई, 1857 को शुरू हुआ यु˜ 10 मई, 1908 को समाप्त नहीं हुआ है, वह तब तक नहीं रूकेगा
किया गया। इंडिया आॅफिस लाइबे्ररी और ब्रिटिश म्यूजियम लाइब्रेरी में लगातार एक वर्ष तक बैठने के कारण यह तो छिपा नहीं था कि सावरकर 1857 का अध्ययन कर रहे हैं; परंतु उनका अध्ययन किस दिशा में जा रहा है, इसका कुछ आभास इस पैंफ्लेट की काव्यमयी ओजस्वी भाषा 1857 के शहीदों के माध्यम से भावी क्रांति का आह्नान थी। सावरकर ने लिखा-‘‘10 मई, 1857 को शुरू हुआ यु˜ 10 मई, 1908 को समाप्त नहीं हुआ है, वह तब तक नहीं रूकेगा