नाना ने उत्साहित करने और स्वयं अगुवाई कर साहस लाने की कोशिश की, फिर भी हताश हुए सिपाही और विजय से उन्मŸा अंगे्रजी सोल्जर इन दोनों के मध्य का अंतर पाटना बहुत कठिन था। अंगे्रजों ने एक हमला और किया और निराशा से भरी टक्कर विफल हो गई और कानपुर के रण क्षेत्र में विजयश्री फेंककर विद्रोही ब्रह्यवर्त की ओर भाग खड़े हुए।
17 जुलाई को प्रातः हैवलाॅक की विजयी सेना कानपुर शहर में प्रवेश करने लगी। अस्तत होती अंगे्रजी
नाना ने उत्साहित करने और स्वयं अगुवाई कर साहस लाने की कोशिश की, फिर भी हताश हुए सिपाही और विजय से उन्मŸा अंगे्रजी सोल्जर इन दोनों के मध्य का अंतर पाटना बहुत कठिन था। अंगे्रजों ने एक हमला और किया और निराशा से भरी टक्कर विफल हो गई और कानपुर के रण क्षेत्र में विजयश्री फेंककर विद्रोही ब्रह्यवर्त की ओर भाग खड़े हुए।
17 जुलाई को प्रातः हैवलाॅक की विजयी सेना कानपुर शहर में प्रवेश करने लगी। अस्तत होती अंगे्रजी