मिला। वह कमिश्नर धूर्त था। सारा हिंदुस्थान राजद्रोही हो गया था तब भी सिख लोग अभी तक असल राजनिष्ठ थे, इसलिए रैटरे के अधीनस्थ दो सौ सिख सिपाही पटना शहर की सुरक्षा के
1857 का स्वातंत्र्य समर - 260
लिए टेलर ने तत्काल बुलाए और वे उस बुलावे के अनुसार पटना की ओर आने के लिए निकले। पर रास्ते पर पूरे प्रदेश भर में रात-दिन उनकी ‘छिः-थूः’ शुरू हो गई। स्वदेश के प्रति नमकहरामी करने का आरोप उनपर लगने लगा। रास्ते के गांव उन्हें व्यंग्य से पूछते,
मिला। वह कमिश्नर धूर्त था। सारा हिंदुस्थान राजद्रोही हो गया था तब भी सिख लोग अभी तक असल राजनिष्ठ थे, इसलिए रैटरे के अधीनस्थ दो सौ सिख सिपाही पटना शहर की सुरक्षा के
1857 का स्वातंत्र्य समर - 260
लिए टेलर ने तत्काल बुलाए और वे उस बुलावे के अनुसार पटना की ओर आने के लिए निकले। पर रास्ते पर पूरे प्रदेश भर में रात-दिन उनकी ‘छिः-थूः’ शुरू हो गई। स्वदेश के प्रति नमकहरामी करने का आरोप उनपर लगने लगा। रास्ते के गांव उन्हें व्यंग्य से पूछते,