1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

‘‘स्वराज्य का कोई सच्चा भक्त हो तेा मुझे मुक्त करो!’’ उसका यह निवेदन स्वराज्य-भक्त के कान में जाने से पूर्व ही उसकी निर्जीव देह फांसी पर लटक रही थी।

इस वारिस अली के पत्र मे मिले सबूत पर उपर्युक्त नेता अली करीम को भी पकड़ने का आदेश जारी कर उसक काम के लिए एक यूरोपियन टोली भेजी गई। मि. लुई के सामने दिखते-न-दिखते अली करीम अपने हाथी पर चढ़ा। वह आगे और लुई पीछे, ऐसी जंगी दौड़ शुरू हुई। परंतु जल्दी ही दौड़


1251 of 2102

‘‘स्वराज्य का कोई सच्चा भक्त हो तेा मुझे मुक्त करो!’’ उसका यह निवेदन स्वराज्य-भक्त के कान में जाने से पूर्व ही उसकी निर्जीव देह फांसी पर लटक रही थी।

इस वारिस अली के पत्र मे मिले सबूत पर उपर्युक्त नेता अली करीम को भी पकड़ने का आदेश जारी कर उसक काम के लिए एक यूरोपियन टोली भेजी गई। मि. लुई के सामने दिखते-न-दिखते अली करीम अपने हाथी पर चढ़ा। वह आगे और लुई पीछे, ऐसी जंगी दौड़ शुरू हुई। परंतु जल्दी ही दौड़


1251 of 2102