1857 का स्वातंत्र्य समर - 261
करीम को छोड़ दिया और अपने गोरे मालिक के पास अपना सा मंुह लिये लौट गया। पटना शहर में जब यह पकड़ा-धकड़ी चल रही थी तब पटना शहर के कितने ही नेताओं के नमा टेलर को अलग-अलग रास्ते से ज्ञात हो गए और उसने उनपर भी आकस्मिक छापा डालने का निश्चय किया। क्रांति पक्ष के प्रमुख नेताओं के घरों में क्रांतिकारियों की बैठकें रात्रि में होने के कारण तथा गोपनीयता के कारण सदस्यों के नामों की
1857 का स्वातंत्र्य समर - 261
करीम को छोड़ दिया और अपने गोरे मालिक के पास अपना सा मंुह लिये लौट गया। पटना शहर में जब यह पकड़ा-धकड़ी चल रही थी तब पटना शहर के कितने ही नेताओं के नमा टेलर को अलग-अलग रास्ते से ज्ञात हो गए और उसने उनपर भी आकस्मिक छापा डालने का निश्चय किया। क्रांति पक्ष के प्रमुख नेताओं के घरों में क्रांतिकारियों की बैठकें रात्रि में होने के कारण तथा गोपनीयता के कारण सदस्यों के नामों की